सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों की सफलता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से,संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने, 25 सितंबर 2015 को आयोजित अपने 70 वें सत्र में “ट्रांसफोर्मिंग आवर वर्ल्ड :2030” सतत विकास के लिए एजेंडा नामक दस्तावेज को अंगीकार किया, जिसमें 17 सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) और संबंधित 169 लक्ष्य शामिल है । सतत विकास लक्ष्य विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण आयामों को एकीकृत करते हुए वैश्विक लक्ष्यों की एक व्यापक सूची है । इसके अलावा, सतत विकास लक्ष्य सार्वभौमिक (सभी देशों के लिए-विकसित, विकासशील और कम से कम विकसित), परस्पर और अविभाज्य है और इस प्रकार सबको एक साथ लाने में व्यापक और सहभागी दृष्टिकोण की आवश्यकता है ताकि कोई छूट न जाएं । देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी वर्ष 2030 तक लक्ष्यों और ध्येयों को लागू करने में की गई प्रगति के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर अनुवर्ती कार्रवाई और समीक्षा करना है।
शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों तथा संबद्ध लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी के लिए 231 अलग-अलग वैश्विक संकेतकों को चिन्हित किया गया ।
The SDGs are not legally binding but have become de-facto international obligations and have potential to reorient domestic spending priorities of the countries till 2030.
इन देशों से यह अपेक्षा की जाती है कि वो इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वामित्व अधिकार लें और राष्ट्रीय ढांचा तैयार करें । इसका कार्यान्वयन और सफलता देशों की अपनी सतत विकास लक्ष्य विकास नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों पर निर्भर करेगी ⃓
2030 के एजेंडे ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि लक्ष्य पर प्रगति के मापन के लिए और सुनिश्चित करने के लिए कि "कोई भी वामपंथी नहीं है" गुणवत्ता, विश्वसनीय और असहमतिपूर्ण डेटा की आवश्यकता होगी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा युनाइटेड नेशंस रेज़ीडेंट कोओर्डिंनेटर कार्यालय (यूएनआरसीओ) के सहयोग से इंडिया एसडीजी डैशबोर्ड तैयार किया गया ⃓
एसडीजी यूनिट के अधिकारी
सतत विकास लक्ष्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकीय आयोग द्वारा गठित सतत विकास लक्ष्य संकेतक से इंटरएजेन्सी तथा विशेषज्ञ समूह द्वारा (अईएइजी-सतत विकास लक्ष्य) वैश्विक संकेतक ढांचा (जीआईएफ़) तैयार किया गया । और मार्च 2017 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकीय आयोग के 48 वें सत्र में इस पर सहमति मिली l
SDG Global Indicators
प्रमुख विशेषताएं
प्रारंभ में, वैश्विक संकेतक ढांचा (जीआईएफ) में कुल 244 संकेतक सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें से कुछ को दो या तीन अलग-अलग लक्ष्यों के अंतर्गत दोहराया गया था, जो कि विशिष्ट वैश्विक संकेतकों को 232 बना देते है ।
वैश्विक संकेतक ढांचा को बाद में 6 जुलाई 2017 को महासभा द्वारा अपनाया गया था और यह 2030 सतत विकास(ए/आरईएस/71/313), अनुबंध के लिए 2030 एजेंडा से संबंधित सांख्यिकी आयोग के कार्य पर महासभा द्वारा अंगीकार किए गए संकल्प में निहित है ।
संकल्प के अनुसार, संकेतक ढांचे को सालाना परिष्कृत किया जाएगा और मार्च 2020 में इसके पचासवें सत्र में सांख्यिकीय आयोग द्वारा व्यापक रूप से समीक्षा की जाएगी और 2025 में इसके छठे सत्र में आयोजित किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकीय आयोग (यूएनएससी) ने मार्च 2020 में आयोजित अपने 51 वें सत्र में वैश्विक संकेतक ढांचा की समीक्षा की है।
संयुक्त राष्ट्र के सांख्यिकी प्रभाग ने संकेतक के पद्धतिगत विकास, डेटा प्रवाह तंत्रों की स्थापना, प्रत्येक वैश्विक संकेतक संबंधी आंकडों की निगरानी और प्रसार के लिए जिम्मेदार कस्टोडियन एजेंसियों की पहचान की है ।
कस्टोडियन एजेंसियां आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र निकाय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एजेंसियां हैं ।कस्टोडियन एजेंसी को संकेतक विकास प्रक्रियामें देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यलयों में शामिल करना आवश्यक है ।
सतत विकास लक्ष्य संबंधी वैश्विक रिपोर्टिंग, कस्टोडियन एजेंसियों द्वारा संकलित राष्ट्रीय कार्यालय सांख्यिकीय प्रणाली से प्राप्त आंकड़ा उपयोग करके वैश्विक संकेतक ढांचा के आधार पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा की जाएगी ।
संकेतक के वार्षिक शोधन संकेतक सूचक ढांचे में शामिल होते हैं जैसे वे होते हैं। समूह के जनादेश के अनुरूप, IAEG-SDGs ने 2020 के व्यापक समीक्षा के हिस्से के रूप में प्रतिस्थापन, संशोधन, परिवर्धन और विलोपन के रूप में फ्रेमवर्क में 36 बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा, जिन्हें मार्च 2020 में 51 वें सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित किया गया था। ।
सतत विकास लक्ष्य के वैश्विक संकेतक ढांचे में समीक्षा के बाद 231 अद्वितीय संकेतक शामिल हैं । कृपया ध्यान दें कि 2020 की व्यापक समीक्षा के बाद सतत विकास लक्ष्य के एसडीजी संकेतकों के जीआईएफ में सूचीबद्ध संकेतकों की कुल संख्या 247 है , जिनमें दो या तीन अलग-अलग लक्ष्यों के सहित कुछ आवर्ती संकेतक शामिल है ।
भारत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं आवश्यकताओं के लिए राष्ट्रीय रूप से परिभाषित सूचकांकों के आधार पर एस डी जी के कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। नीति आयोग देश में एचडी जी के समग्र कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है जबकि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को भारत में एसडीजी की निगरानी के लिए जीआईएफ के साथ एसडीजी पर राष्ट्रीय सूचकांक फ्रेमवर्क के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
SDG National Indicator Framework (NIF) version 3.0
राष्ट्रीय सूचकांक फ्रेम वर्क वर्जन 1.0
राष्ट्रीय सूचकांक फ्रेमवर्क वर्जन 2.0
राष्ट्रीय सूचकांक फ्रेमवर्क वर्जन 2.1
एन आई एफ हैंडबुक 29 जून 2019 को जारी
2018 में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने चेन्नई डाटा स्रोतों के साथ 306 राष्ट्रीय सूचकांक को और संबंधित मंत्रालय विभाग यूएन एजेंसियों और अन्य पदाधिकारियों के साथ आर्थिक रूप से किए गए परामर्श ओं को शामिल करते हुए जीआईएफ के साथ एसडीजी पर राष्ट्रीय सूचकांक फ्रेमवर्क एनआईएफ विकसित किया।
एन आई एफ में ऐसडीजी सूचकांकों की समीक्षा एक निरंतर प्रक्रिया हैरान एवं सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय अनपढ़ धारियों के साथ परामर्श से विद्यमान सूचकांकों की उपयुक्तता के साथ साथ संगत लक्ष्यों के लिए नए सूचकांकों की जांच करता है।
वर्तमान में एनआईए फमैं लगभग 300 राष्ट्रीय सूचकांक है और आधिकारिक शांति की प्रणाली के लिए 50 डेटा स्रोत मंत्रालय विभाग एसडीजी पर डाटा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में शामिल है।
देश की चालू राष्ट्रीय एवं उप राष्ट्रीय नीतियों एवं कार्यक्रमों में एसडीजी समेकन की दिशा में किए गए इसके प्रयासों के साथ ही नीति आयोग ने संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों विभागों के केंद्रीय प्रायोजित कार्यक्रमों के साथ एसडीजी का खाका तैयार किया।
वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली और एमओएसपीआई एसडीजीसूचकांकों के लिए डाटा प्रवाह को संस्थागत करने के लिए संबद्ध मंत्रालयों के साथ समेकन स्थापित करता है।
एन आई एफराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे डीजी की निगरानी का आधार है और नीति निर्माताओं एवं विभिन्न स्कीमों और कार्यक्रमों की कार्यान्वयन कारी एजेंसियों को सही दिशा उपलब्ध कराता है ऐसे डीजी के स्थानीयकरण को ध्यान में रखते हुए राज्य संघ राज्य क्षेत्र भी राज्य और जिला स्तर पर यही कार्य कर रहे हैं सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय इस कार्य में राज्य संघ राज्य क्षेत्रों का सहयोग करता है।
नीति आयोग, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, मंत्रालय,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओएफ़सीसी), वित्त मंत्रालय के सदस्यों के साथ भारत सरकार के मुख्य सांख्यिकीविद (सीएस आई) और सचिव, की अध्यक्षता मे सतत विकास लक्ष्यों के लिए एक उच्च स्तरीय संचालन समिति (एचएलएससी) का गठन किया है
MoSPI has constituted six Sectoral Committees for working on the methodologies of SDG indicators. These Sectoral Committees consisting of members inter-alia, from relevant data source Ministries, UN Agencies/Development Partners, Research Institutions will mainly work together for evolving methodology for Tier III global indicators, examination of Tier I and Tier II global indicators in Indian context and identifying data gaps in monitoring of SDGs.
These Sectoral Committee for SDGs are on following themes
Poverty, Agriculture and Food Security
Labour & Employment and Education
Health and Gender related issues
Environment and Climate change
Good Governance and Capacity Building
Big Data, AI, Block Chain and Machine learning for SDGs
Order constituting Sectoral Committees
राष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्य पर कोई भी कथन राज्य में प्रचलित स्थिति से संबंधित टिप्पणी के बिना अधूरा है l सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय राज्यों को व्यापक और समावेशी सतत विकास लक्ष्य निगरानी ढांचे के विकास में पर्याप्त तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है । . मंत्रालय ने संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों में राज्य स्तरीय निगरानी ढांचे के विकास के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सुविधाजनक बनाने और सहायता प्रदान करने हेतु राज्य संकेतक ढांचे (एसआईएफ) के विकास के लिए दिशानिर्देशों को तैयार और उनका परिचालन किया हैं ।
इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीत संकेतक ढांचे संबंधी निर्माण से सतत विकास लक्ष्य पर होने वाले प्रगति को ट्रैक करने के लिए संस्थागत व्यवस्था को शामिल करके राज्य स्तरीय निगरानी ढांचे के विकास में राज्य सरकारों की सुविधा और सहायता प्रदान करना है ।
सतत विकास लक्ष्यों के विकास के लिए दिशानिर्देश (एसडीजी) राज्य संकेतक फ्रेमवर्क (SIF) के विकास हेतु दिशानिर्देश (संस्करण 1.1)
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय अन्य बातों के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्य संकेतकों की अवधारणाओं और कार्यप्रणाली पर विचार विमर्श करने, विभिन्न हितधारकों के साथ विचार मंथन और सतत विकास लक्ष्यों पर जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य संकेतकों का विकास करने हेतु राज्य/ संघ राज्य क्षेत्रों की सहायतार्थ प्रशिक्षण/कार्यशाला/ संगोष्ठियाँ/सम्मेलनों का आयोजन करता है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने निम्नलिखित प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया है
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सतत विकास लक्ष्यों पर राज्य सांख्यिकी कार्मिकों के क्षमता निर्माण और राज्य निगरानी ढांचे के विकास, सतत विकास लक्ष्य के बारे में अवगत कराने हेतु यूनिसेफ के सहयोग से सभी 36 राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को शामिल करके वर्ष 2018-19 के दौरान पाँच क्षेत्रीय कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया ।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सतत विकास लक्ष्य के निगरानी ढांचे को समझने के लिए विश्वविद्यालयों/कॉलेजों के छात्रों के लिए संवेदीकरण कार्यक्रम का भी आयोजन किया है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय केंद्रीय और राज्य सांख्यिकीय का वार्षिक सम्मेलन(सीओसीएसएसओ) 11 से 12 नवंबर 2019 के दौरान केंद्रीय थीम के रूप में सतत विकास लक्ष्यों के साथ आयोजित किया गया था । राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को तथा उप राज्य स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों कि निगरानी करने के लिए राज्य/जिला संकेतक ढांचा के विकास के लिए राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को तकनीकी सहायता प्रदान की गई थी ।
कृषि और किसान कल्याण और आईसीएआर-आईएएसआरआई और अन्य कृषि सांख्यिकी 2019 (आईसीएएस-VIII) पर आठवां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 18-21 नवंबर 2019के दौरान, नई दिल्ली में हुआ ।
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